अफ़सोस की कहानी छोर भी दो

आज जरा फिर से कुछ बोल भी दो
हम तुम्हारे है दिलबर दिल-ऐ- राज खोल भी दो

पढ़ना चाहते है तुम्हारी आँखों का वीरानापन
जरा हमारी तरफ देख आँखे खोल भी लो

चलती है सांसे तुम्हारे होने से
जरा इन धड़कनों की गुस्ताखी में खो भी लो

राबता-ए- खुदाया सी क़ुरबत है तुमसे
जरा महोबत के दरवाजे खोल भी लो

खामोशी तुम्हारी ये मर जाती है
सबद-ए-बाण जी भर के मर ही लो

रूह का रूह से वास्ता है सुधि
अफ़सोस की कहानी छोर भी दो

SuDhi

#SuDhi

11 thoughts on “अफ़सोस की कहानी छोर भी दो

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  1. पढ़ना चाहते है तुम्हारी आँखों का वीरानापन
    जरा हमारी तरफ देख आँखे खोल भी लो
    वाह।।बहुत बढ़िया।।

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  2. राबता-ए- खुदाया सी क़ुरबत है तुमसे
    जरा महोबत के दरवाजे खोल भी लो
    Purani cheez a yaad dila diya aapne
    😅😃😃😃😃😃

    Liked by 1 person

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