दिल और  दिमाक

दिल और दिमाक में अक्षर बहस चलती है

मै हु तेरा इससे अच्छा ,जुस्तजू बदलती है

दिल कहता तू मेरी सुन ले

प्यार तुजे सिखाऊंगा

दिमाक कहता चल संग मेरे

दुनिया पे राज करवाऊंगा

दिल कहता तू सब कुछ कह दे

तुझको चैन दिलाऊंगा

दिमाक कहता कुछ नहीं रखा

सबसे दूर ले जाउगा

दिल कहता मैं हु तेरा

इतबार तुजे समझाऊंगा

दिमाक कहता जाने भी दे

झूठ से तुजे बचाऊगा

दोनों की फिर अपनी दलीले हजार चलती है

इनदोनों के चलने से मेरी नईया गिरती संभलती है

SuDhi

#SuDhi

6 thoughts on “दिल और  दिमाक

Add yours

  1. आप ने अच्छा लिखा हैं पर फिर भी हम लोग हिंदी में हिंदी के लिए लिखते है इसलिए छोटी मुँह बड़ी बात कह रहा हूँ शायद आपकी कविता में कुछ टाइपिंग मिस्टेक हो गयी कृपया उनको सुधार कर उसमे चार चाँद लगा दीजिये

    गुस्ताख़ी माफ़ करना

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: