जो तुम आजकल बिन बोले हमसे कुछ इस तरह बाते करते हो

जो तुम आजकल बिन बोले हमसे कुछ इस तरह बाते करते हो

जैसे कंगना हाथों में चुड़ियाो से पहली सौगात करते हों

जो हर पल यु मेरे इर्द गिर्द सेे इतनी बार गुजरते हो

तकल्लुफ नहीं है लफ्जो को

आँखों में जो सब पढ़ते हो

दिल जोर जोर से धड़के है जब तुम गुस्ताख़ी करते हो

जो तुम आजकल बिन बोले हमसे कुछ इस तरह बाते करते हो

जैसे कंगना हाथों में चुड़ियाो से पहली सौगात करते हों

एक पल जो ग़ायब हो जाऊ तुम घबरा के झगड़ते हो

जुल्फों के साये में खोकर

कितने वादे करते हो

मेरी हर परेशानी तेरी मुझसे ज़्यदा समझते हो

जो तुम आजकल बिन बोले हमसे कुछ इस तरह बात करते हो

जैसे कंगना हाथों में चुड़ियाो से पहली सौगात करते हो

कैसे कह दू खुश हु तुझ बिन जो तन्हा मुझको करते हो

अंधरों में डरती है SuDhi अब भी

क्यों बेरुखी करते हो

चले आओ अब लोट भी आओ क्यों नहीं नई शुरुआत करते हो

जो तुम आजकल बिन बोले हमसे कुछ इस तरह बात करते हो

जैसे कंगना हाथों में चुड़ियाो से पहली सौगात करते हो

SuDhi

#SuDhi

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