एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है

On demand
Kuch jyda hi likh diya tha humne apne ishq ibadat pe
Chlo ab thora likhte Hain bechain dil ki halat pe

एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है
प्यार के नाम पे जुल्म सहने की इबादत है

जो तू रोज रोज आ जाता है मेरी कहानी में
रोज रोती हु मै फ़िर अपनी ज़िंदगानी में
तुझे प्यार तो नहीं है मुझसे जानती हु मै दिलबर
अक्ष देखना सुहाए तुजे मेरी आँखों में दिनभर

एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है
प्यार के नाम पे जुल्म सहने की इबादत है

तेरा जो मुझ में घुलना पल में दूर हो जाना
साजन नहीं है मोसम यु पल में बदल जाना
तू प्यार है मेरा वरना दुनिया को बताती मै
तुझसा नहीं बुरा कोई सबको दिखाती मै

एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है
प्यार के नाम पे जुल्म सहने की इबादत है

तू सोच भी नहीं सकता इतना इश्क़ है तुझसे
जिस दिन दिल भरा ना देखेगी कभी SuDhi मुड़के

खुदा भी खुश हो जाएगा जब तुझसे दुर जाऊगी

आख़िर इबादत में तुझे छोर कुछ और तब चाहुगी

एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है

प्यार के नाम पे जुल्म सहने की इबादत है

SuDhi

#SuDhi

5 thoughts on “एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है

Add yours

  1. एक तरफ़ा प्यार नहीं कम्बख्त आदत है
    प्यार के नाम पे जुल्म सहने की इबादत है…waah…..khubsurat lekhan.

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: