तू कहीं बाकी हैं

बिछड़ के भी आज तू मुझ में कहीं बाकी है ।

बगल के शहर से भी गुजरो तो भी तू महक जाती है

कोई पहला अक्षर भी बोले जो नाम का तेरे
बस वो यादें उगलने के लिए काफी है ।

ना बन पाए किसी और के ,
हम आज भी हैं तेरे
क्या ये बेहद मोहब्बत करना भी गुस्ताखी है ।

बिछड़ के भी आज तू मुझ में कहीं बाकी है ।।

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