त्याग

त्याग दी ख्वाहिश उसने कुछ करने के लिए जैसे राम ने सब खोया था "श्री राम" बनने के लिए आरजु ओर दुआ सब छुपा के बैठे हैं खुद में वनवास काटना है उन्हें भी मग़र खुद के लिए मुझे समझ कर भी उन्होंने नजरअंदाज कर दिया जैसे लक्ष्मण ने किया था उर्मिला को कुछ पल... Continue Reading →

ख़ुदा

मुझे हर दुःख की "दवा" चाहिए दुआ है दुआ में खुदा चाहिए बड़ी सिद्दत से पाला है मुझे उस ख़ुदा के लिए भी दुआ चाहिए मेरी आँखों में मुझको माँ पढ़ लेती है किताबें थी जिसने पढ़ी ही नहीं मेरे लफ्ज़ो से पहले पिता से मिला सब मुझे ओर कहूं मैं की मुझे समझा ही... Continue Reading →

तुम बदले थे, हम संभले थे

तेरा आना भी जरूरी था ओर जाना भी लाज़मी था भला इश्क़ है क्या दुनिया मे समझाना भी लाज़मी था ना तो ग़लती थी तेरी ना ग़लत तब मैं थी तेरा सताना भी जरूरी था तड़पाना भी लाज़मी था मेरी रूह के एक हिस्से को चुराना भी लाज़मी था मैं रोई थी, की खोई थी... Continue Reading →

गुनाह

गुनाह किया है इश्क़ का तो सजा भी ख़ास होगी बेमतलब महोबत्त की दास्तां मतलब पे आकर रुकेगी वो हमदम तेरा दिलबर आज भी तेरा ही होगा बस फ़र्क इतना कि अब तुझे उसपर हक नहीं होगा अपनी परछाई में भी जब सुरत उसकी ही दिखेगी तो समझ जाना बस अब से कहानी उल्टी ही... Continue Reading →

क्या हुआ अगर अब हमारी बात नहीं होती

वो मुझमें मुझसा खोया है दिल मे कहीं दफन सा होया है वो चांद है मेरी रातों का बरसात दोपहर की भादों का वो आज भी मुझमें ज़िन्दा है मेरा है मुझपे ही मरता है ब-दस्तूर हमारा मिलना है जुस्तजु क्या जो बिछड़ना है वो सिद्दत है मेरी दुआओं का इबरत है मेरी वफ़ाओं का... Continue Reading →

डर लगता है

दुनिया की लकीरों से डर लगता है महोबत के फकीरों से डर लगता है हो ना जाये महबुब-ए-गली में जिस्मों का सौदा इश्क़ नहीं! हमें इश्क़ के गरीबों से डर लगता है #SuDhi SuDhi

पर्दा

हर किसी को आज, फ़िकर रहती है मेरे पर्दे की नापाक हुशन, ज़ालिम जवां औऱ मेरे क़ायदे की जो सोच में ही, सोच हो छोटी लो मैं उसको गाती हुँ बीती क्या उस औरत पे वो, मैं आज बतलाती हुं पैदा हुई तो घरवालों ने भी रखा था उसको पर्दे में हुई जवां तो बुरखा... Continue Reading →

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