बेवज़ह

वो हमसे बात भी वज़ह देख कर करते थे ओर हम महोबत भी बेवज़ह कर बैठे #SuDhi SuDhi

महफुज

महफुज बताते बेटी को, वो घर के बंद दरवाजों में बता कहाँ लुटी द्रोपदी, घर में या बाजारों में इज्ज़त ओर इजाज़त में बस फ़र्क यहाँ आ जाता है अपनी बहन को उड़ाने दुपट्टा वो छिन किसी का लाता है आंखों में शराफत भी तो गिरगिट सा रंग बदलती है चौराहे पे चलती लड़की माल... Continue Reading →

ज़ाहिल

ज़ाहिल ही सही ,हां हुँ मैं पुराने ख़्यालयत की किसी के लिए नहीं गवा सकती, इज्जत माँ बाप की #SuDhi SuDhi

हक

हक से चाहे मुझे डांट ले कोई गले लगा गम बांट ले कोई #SuDhi SuDhi

वक़्त

आँखे टिकाओ या दिल सजाओ दरवाजे पे आने वाले वक़्त से पहले नहीं आते #SuDhi SuDhi

इंसाफ

मोहरे अक्सर मात खाते हैं जब बात वज़ीर की आती है वो अपने कह लुट जाते हैं जब बात इंसाफ की आती है #SuDhi SuDhi

Samajh baithe

Dil to nhi tuta mohtarma Bs dilgai galt kr li thi Kisi or ki khani me Kisi or ke hisse ki Kuch dino ke liye Kmi puri bas kr di thi Hum nadan the jo ise ishq samjh baithte Khata dil ki jo Umiad jaga baithe Khwabo ke tutne ko Or Unke ruthne ko Galat... Continue Reading →

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